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Bihar Sugar Mills: गोपालगंज, सकरी और रैयाम की बंद चीनी मिलें फिर होंगी शुरू, सरकार ने किया बड़ा ऐलान

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Alam Ki Khabar: बिहार सरकार ने गोपालगंज, सकरी और रैयाम की बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की घोषणा की है। केंद्र सरकार की संस्था के साथ एमओयू कर जल्द संचालन शुरू करने की तैयारी है।

पटना, 21 जुलाई। आलम की खबर: बिहार सरकार ने वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। विधान परिषद में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि गोपालगंज, सकरी और रैयाम की बंद चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार की एक संस्था के साथ जल्द ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि सरकार इन बंद उद्योगों को पुनर्जीवित कर कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देना चाहती है। उनका कहना था कि मिलों के शुरू होने से गन्ना किसानों को अपनी उपज का बेहतर बाजार मिलेगा, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे कारोबार को भी नई गति मिलेगी।

सदन में इस दौरान नल-जल योजना के रखरखाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विभिन्न दलों के सदस्यों ने योजना की जिम्मेदारी दोबारा वार्ड सदस्यों को सौंपने की मांग की। उनका तर्क था कि स्थानीय जनप्रतिनिधि क्षेत्र की जरूरतों और समस्याओं को बेहतर ढंग से समझते हैं, इसलिए रखरखाव की जिम्मेदारी उन्हें दी जानी चाहिए।

इस पर पीएचईडी मंत्री संजय कुमार सिंह ने सरकार की मौजूदा व्यवस्था की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि पंचायती राज विभाग और पीएचईडी विभाग के साथ संयुक्त बैठक कर इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा और व्यवहारिक समाधान निकाला जाएगा।

विधान परिषद में सूखे नशे के बढ़ते प्रचलन का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठा। राजद सदस्य सुनील कुमार सिंह ने राज्य में गांजा, अफीम और हेरोइन जैसे मादक पदार्थों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताई। इस दौरान उनके एक बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद सदन में कुछ समय तक तीखी बहस होती रही।

सरकार का मानना है कि बंद चीनी मिलों को दोबारा चालू करने का फैसला बिहार के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो इसका सीधा लाभ किसानों, श्रमिकों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलने की उम्मीद है।

बंद उद्योगों का पुनर्जीवन विकास की नई राह खोल सकता है

बिहार में कई चीनी मिलें वर्षों से बंद हैं, जिससे गन्ना किसानों और हजारों श्रमिक परिवारों पर असर पड़ा है। यदि सरकार अपने वादे को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारती है तो यह केवल उद्योगों की वापसी नहीं होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। हालांकि सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषणा कितनी तेजी से वास्तविक परियोजना में बदलती है।

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